सोमवार, 19 अक्टूबर 2020

सामाजिक प्रक्रिया पर वंशानुक्रम तथा वातावरण की भूमिका (Role of Heredity and Environment on socialization Process)

 

सामाजिक प्रक्रिया पर वंशानुक्रम तथा वातावरण की भूमिका

(Role of Heredity and Environment on socialization Process)

 

 

वंशानुक्रम और वातावरण (Heredity and Environment):

वंशानुक्रम का अर्थ (Meaning of Heredity) : जैसा कि देखा गया  है बालक को अपने माता पिता द्वारा बहुत से गुण मिलते है, माता पिता जैसे होते है उनके बच्चे भी वैसे होते है वही दूसरी ओर यह भी देखा गया  है कि बच्चे मातापिता से अलग होते हैउदाहरण:  बुद्धि स्तर पर असमान, रंग रूप में असमान तथा शारीरिक रचना में अन्तर आदि कई बार यह भी देखा गया है बुद्धिमान मातापिता की संतान मूर्ख रह जाती है और अनपढ़ मातापिता की संतान बुद्धिमान हो जाती है।

परिभाषाआनुवंशिता ( Heridity) : बालक को आपने मातापिता और पूर्वजों द्वारा असंख्या शारीरिक और मानसिक गुण र्गभाधान के समय वीर्य (Sperm) एवं रजकणों (Ovuma) से प्राप्त होते है उन्हे ही आनुवंशिकता या  वंशानुक्रम (heredity) की संज्ञा दी गयी है। जीव विज्ञान (Biology) के अनुसारनिषक्त अण्ड में सम्भाव्यत: उपस्थित विशिष्ट गुणों का योग ही आनुवांशिकता है।

साधारण शब्दों में कहा जा सकता है की वंशानुक्रम का अर्थ जैसे मातापिता होते है वैसे ही उनकी संतान इस प्रकार से यदि मातापिता बुद्धिमान है तो बच्चे भी बुद्धिमान होगें ।

डालस एवं हालैण्ड ( Duglash & Halland ) के शब्दों में एक बालक की आनुवंशिकता में उन सभी शारीरिक संरचनाओं, विशेषताओं, क्रियाओं एवं क्षमताओं का योग निहित रहता है जिनको वह अपने मातापिता अन्य पूर्वजों या प्रजाति से प्राप्त करता है।

अनुवंशिकता एंव वातावरण को जानने सै पहले यह जानना जरूरी हैं की बालक के अध्ययन के लिए कौन मुख्य रूप से उत्तरदायी है आनुवंशिकी विज्ञान (Gentics) द्वारा माना गया कि विकास केवल आनुवंशिकता का परिणाम है यह किसी अन्य कारक के द्वारा निर्धारित नहीं होता है। परन्तु पर्यावरणवादियों का कहना है कि जीवन को जिस प्रकार का पर्यावरण मिलता है उसी प्रकार से उसका  विकास होता है। आनुवंशिकतावादियों एंव पर्यवरणवादियों ने अपने कुछ प्रयोग तथा पक्ष रखे। अतः यह पर  सर्वप्रथम हम यह प्रयोगिक परिणाम का वर्णन करगे। आनुवंशिकतावादियों ने ज्यादातर प्रयोग और अध्ययन परिवार( families) तथा बहुत से जुड़वा बच्चों ( Identical twiens) के बारे में अध्ययन किया है जो यह है-

गाल्टन का अध्ययन ( Galton’s Study) :

प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक गाल्टन ने 1977 में एक अध्ययन किया जिस में उन्होने यह पाया  कि वैयक्तिक भिन्नता आनुवांशिकाता का परिणाम है कि परिवेश का प्रभाव। उन्होने ने इस अध्ययन मे इंगलैंड के उच्च कोटि के व्यक्तियों पर अध्ययन किया जिन में विद्वानों, न्यायाधीशों,राजनैतिक नेताओं, वैज्ञानिको, प्रधानमंत्री एव कवि साहित्यकार थे इस अध्ययन में उन्होंने पया की इन सभी सुप्रसिद्ध व्यक्तियों के अधिकांश पूर्वज बुद्धिमान तथा उच्च व्यक्तित्व के थे। इस अध्ययन द्वारा यह स्पष्ट हो गया की बुद्धि तथा मानासिक योग्यताओं पर आनुवंशिकत का प्रभाव अत्यधिक होता है।

इस अध्ययन के बाद 977 साधारण व्यक्तियों का अध्ययन किया इस में उन्होंने पाया केवल चार व्यक्तियों के पूर्वज प्रसिद्ध और सम्पन्न पाये गये। इन दोनो अध्ययन द्वारा (सुप्रसिद्ध व्यक्तियों पर प्रयोग साधरण व्यकितयों पर प्रयोग) यह  सिद्ध हो गया की व्यक्तियों में जो व्यक्तिक भिन्नता पायी जाती है उसका का संबंध आनुवंशिकता का परिणाम है ही परिवेश का प्रभाव।

डगडेल का अध्ययन (Dugdals Study) :


 

जिस परिवार के पूर्वज मन्द बुद्धि के पाए जाते हैं या होते है, उनकी सन्तान भी मन्द बुद्धि ही होगी।डगडेल ने अपने इस अध्ययन में ज्यूक्स (Jukes) नामक परिवार का अध्ययन किया। जो एक आवारा और अशिक्षित व्यक्ति था। और उन्होंने एक बाजारू स्त्री से विवाह किया। उनका जन्म 1720 ई० में था, 1877 ई० तक आते आते उनके परिवार की संख्या लगभग 1200 व्यक्ति हुए इसमें थे :-

हत्यारे7, अपराधी130, चोर60, चरित्रहीन स्त्री50, भिखमंगे310

फिर इस के बाद डगडेल (Dugdal) ने 1915 पुन्हा उस परिवार का अध्ययन किया और पाया कुध परिवार के लोग  अपने मातृ स्थान से कही और जा कर बस गये थे, फिर भी उन्होने यह देख की उनमें मे सभी विशेषाएं मौजूद थीं।

जुड़वाँ बच्चों का अध्ययन (Twin Children Study)

बुद्धि और विकास पर वंशानुक्रम को समझने में जुड़वाँ बच्चों के अध्ययन बहुत महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ इस अध्ययन द्वारा पाता चाला जुड़वा बच्चे दो प्रकार के होते हैंसमान जुड़वाँ बच्चे (Identical twins) तथा साधारण जुड़वाँ बच्चे (fraternal twins) इस अध्ययन में हम जुड़वा बच्चों पर किए गए विभिन्न प्रयोगों को देखेंगे

इस का अध्ययन तीन प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक ने किया जिनके नाम हैन्यूमैन (Newman), हाँलजिंगर (Holzinger) तथा फीमैन (Freeman) इन सभी मनोवैज्ञानिक ने बुद्धि और विकास पर वुशानुक्रम के प्रभाव को जानने के लिए दो प्रकार के समान जुड़वाँ बच्चों (Identical twins ) का अध्ययन किया।

इस अध्ययन में कुछ ऐसे बालक थे जिनका लालन पालन एक ही साथ हुआ और कुछ ऐसे बालक जिनका लालन पालन विभिन्न वातावरण में हुआ। इस अध्ययन मे उन्होने दोनो प्रकार के समान जुड़वा बच्चों की बुद्धि लब्धि की जाँच किया और यहाँ निष्कर्ष निकला कि एक साथ पलने वाले बच्चों की बुद्धिलब्धि में पाँच या छः ईकाइयों का अन्तर था जबकि दूसरे जिनका लालन पालन अलग अलग वातावरण में हो रहा था बच्चों की बुद्धिलब्धि में आठ या नौ का अन्तर था ।

इस अध्ययन से यह पता चलता है कि बुद्धि लब्धि पर वातावरण का बहुत ही कम प्रभाव पड़ा बल्कि वंशानुक्रम के कारण ही उन बच्चों की बुद्धि में अत्य अधिक समानता देखाने को मिला ।


 

गेसेस (Gesell) तथा थाम्पसन (Thompson) के अध्ययन द्वारा भी यह सामने आता है कि बुद्धिविकास पर वंशानुक्रम का अत्यधिक प्रभाव पड़ता है । उन्होने अपने अध्ययन में समान जुड़वा बच्चों का अध्ययन किया और पाया कि उनकी शारीरीक  रूप रेखा तथा बुद्धि में काफि समानता थी।  शुरुआत में यह समानता अधिक होती है, लेकिन आयु के बढ़ाने से उसमें कुध कमी हो जाती है। इन करणो द्वार गेसेस तथा थाम्पसन इस निष्कर्ष मे पहुचे की जुड़वाँ बच्चों की बुद्धिलब्धि की यह समानता वंशानुक्रम (आनुवंशिकता) के कारण है कि वातावरण के कारण जो इस प्रयोग द्वारा  सिद्ध हो गया ।

जुड़वा बच्चों का अध्ययन शवेंसिगर (Schwasinger) द्वारा : 

उन्होने इस अध्ययन में दोनो प्रकार के बच्चों पर अध्ययन किया जो थे (समरूप जुड़वा बच्चे तथा बंधु यमज) उन्होंने 10 जोड़ो का अध्ययन किया । दोनो जोड़ो के प्रत्येक सदस्य को अलगअलग वातावरण में  पालन पोषण किया गया और इन बच्चों के बड़े होने पर दोनो का एक तुलनात्मक (Comparative) अध्ययन किया गया इस अध्ययन द्वारा पाया गया दोनो प्रकार के बच्चों की बुद्धि लब्धि (Intelligence quotient /IQ ) में कोई अन्तर  नही पाया गया, पाया गया भी तो बहुत कम अन्तर था। इस अध्ययन द्वारा वंशानुक्रम के महत्व को बल मिला

वंशानुक्रम को कुछ विद्वानो ने कई परिभाषाओं द्वारा स्पष्ट किया । इसके द्वारा हम किसी निष्कर्ष पर पहुंच सकते है ।

जीव शास्त्रीयों के अनुसार : निषेचित अंड में उपस्थित विशिष्ट गुणो का योग ही वंशानुक्रम है

वुडवर्थ के अनुसारः वंशानुक्रम में से सभी कारक शामिल है जो जीवन शुरू करते समय बालक में विद्यामान थे । अर्थात जन्म के समय नहीं  बल्कि  गर्भ धारण करते समय जन्म से लगभग नौ माह पहले

रूथ बेनेडिक्ट के अनुसार : मातापिता से संतान को हस्तान्तरित होने वाले गुणो को वंशानुक्रम कहते है।

उपरोक्त सभी परिभाषाओं से यह निष्कर्ष निकला जा सकता है कि प्रजनन प्रक्रिया द्वारा माता पिता से बच्चों को हस्तांतरित होने वाले गुणों को वंशानुक्रम कह सकते है।

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