किशोरावस्था की विशेषताएं (Characteristics of Adolescence)
किशोरावस्था में जो विशेषताएं परिलक्षित होती है, वे निम्न प्रकार से हैं-
ü शारीरिक परिवर्तन - शारीरिक परिवर्तन शैशवावस्था की भांति तीव्र गति से होते है |
ü मानसिक तथा बौद्धिक विकास - इस अवस्था में मानसिक विकास भी तीव्रगति से होता है तथा चरम बिंदु पर पहुँच जाता है |
ü कल्पना की बहुलता - दिवा स्वप्न किशोरों को प्रेरणा देते है तथा इस आधार परवे रचनात्मक कार्य करते हैं, जो अधिक हानिकारक भी होता है |
ü संवेगात्मक विकास - इस अवस्था में किशोर अत्यधिक भावुक होता है. सुखात्मक संवेग से शक्ति का स्रोत फूट पड़ता है तथा उत्साह में वृद्धि हो जाती है, दुखात्मक संवेग से उसके कार्यो में जल्दबाजी तथा निरुध्येश्यता रहती है | आत्म सम्मान तथा आत्मचेतना की भावना भी अधिक प्रबल होती है | इनके ठेस पहुँचाने पर वह अत्यधिक दुखी अथवा कुंठित हो जाता है |
ü चिन्ताओ में वृद्धि - किशोर अपने भविष्य के प्रति तथा शारीरक सुन्दरता के सन्दर्भ में अधिक चिंतित रहते है | समूह, समाज में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त कने की तीव्र अभिलाषा भी रहती है |
ü वीर पूजा - किशोर आदर्श पुरुष का चयन कर उसका अनुकरण करने लगते है |
ü स्वतंत्रता तथा विद्रोह की भावना - किशोरों में स्वाभिमान की भावना काविकास हो जाता है | वह अभिभावकों तथा अध्यपको के नियंत्रण को पसंद नहीं करता है |
ü विविधतापूर्ण विशेष रुचियाँ - आयु में वृद्धि के साथ-साथ किशोरों के रूचि में विविधता तथा परिवर्तन शीलता बनी रहती है | यह परिवर्तनशीलता 15 -16 वर्ष आयु तक रहती है |
ü विकासात्मक
विशेषताएं (Development characteristics)
ü आत्म-सम्मान की भावना
(Feeling of self respect)
ü अस्थिरता (Instability)
ü किशोरापराध की
प्रवृति का विकास (Development of juvenile delinquent tendency)
ü काम भावना की परिपक्वता (Maturity of sex instincts)
Ø
Ø समलिंगीय काम भावना (Homo-sexual feeling)
Ø विषमलिंगीयकाम भावना (Hetero-sexual feeling)
ü समाज सेवा (Social service)
ü कल्पना का बाहुल्य (Exuberance of
imagination)
ü अपराध प्रवृति (Criminal tendency)
ü धार्मिक भावों का उदय (Development of
religious feelings)
ü स्वाभाविकता का विकास (Development of
originality)
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