पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धान्त की शिक्षा में उपयोगिता
(Educational Implication of
Piaget Cognitive Development)
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पियाजे ने अपने सिद्धांत का प्रयोग शिक्षा के क्षेत्र में करते हुए अनुकरण व खेल की क्रिया को महत्व दिया है । शिक्षकों को अनुकरण व खेल विधि से शिक्षण – कार्य करना चाहिए ।
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पियाजे कहते है कि जो बच्चे सीखने में धीमे होते हैं उन्हें दण्ड नहीं देना चाहिए ।
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पियाजे के सिद्धांत के अनुसार आभिप्रेरणा और बालक दोनों ही अधिगम व विकास के लिए आवश्यक है । इन दोनों को शिक्षा में प्रयोग करना उचित होगा ।
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बच्चों को अपने आप करके सीखने का अवसर हमे प्रदान करना चाहिए ।
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12 वर्ष की अवस्था के बच्चों को समस्या समाधान विधि से पढ़ाया जाना चाहिए क्योंकि 10 -12 वर्ष की आयु तक आते – आते बच्चों में यह क्षमता विकसित होने लगती है ।
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शिक्षकों व अन्य व्यकितयों को बच्चों की बुद्धि का मापन उसकी व्यवहारिक क्रियाओ के आयोग के आधार पर करना चाहिए ।
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बच्चा स्वयं और पर्यावरण से अंतः क्रिया द्वारा सीखता है । अतः हमें ( शिक्षको, माता – पिता ) बच्चे के लिए प्रेरणादायक माहौल का निर्माण कसना चाहिए ।
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इस सिद्धांत के आधार पर शिक्षक एवं अभिभावक बच्चों की र्तकशकित व विचारशक्ति को पहचान सकते हैं ।
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