सोमवार, 19 अक्टूबर 2020

वंशानुक्रम के नियम (Laws of Heredity) :

 

वंशानुक्रम की प्रक्रिया ( Process of heredity ):

 

 

वंशानुक्रम की प्रक्रिया का  संबन्ध प्रजनन से है । जो कि स्त्री पुरुष के मिलन अथवा मैथून (mating) की क्रिया से  संभव होता है। जिस में स्त्री और पुरुष के जनन अंग (Reproductive organs) आपस में मिलते है। और इस प्रक्रिया द्वारा उत्पादक कोशिकाएँ का निर्माण होता है। स्त्री की उत्पादक कोशिका को (Ovam) बोला जाता है, और पुरुष की कोशिका को (Sperm) वीर्य बोला जाता है, जो कि संख्या में हजारों मे होंती है जबकि रजो की संख्या एक मासिक धर्म में एक ही होती है पर फिर भी कभी कभी इन की संख्या एक से अधिक भी हो सकती है।

इस मैथून क्रिया के दौरान जनन अंगो के मिलने से गर्भाशय (utarus) के द्वार पर हजारो की संख्या में Sperm या वीर्य पड़े रहते है जो की मातृसूत्र  Ovum तक पहुँचने का प्रयास करते है। इस संपूर्ण कार्य में एक ही पितृसूत्र या Sperm Ovum तक पहुँच पाता है। और जो Ovum तक पहुच कर निषेचित (Fertilizer) करता है। जो कि निषेचित रच (Zygot) कहलाता है। इस प्रकार निषेचित होना ही गर्भधारण होना कहलता है। जो कि एक जीवन को जन्म देती है। जो कि चित्र के माध्यम से देखे : एक निषेचित अंड में गुणसूत्रो की  23 जोड़े पाये जाते है जिनमें आधेपिता के आधे माता के होते है।

जीवशास्त्रीयो के अनुसारः निषिक्त अण्ड में सम्भावित विद्यमान विशिष्ट गुणों का योग ही आनुवंशिकता है।

वंशानुक्रम के नियम (Laws of Heredity) :

वंशानुक्रम के नियमो को अलग अलग विद्वानो ने भिन भिन प्रकार से बताया है जिन में मैंडल (Mendal) द्वारा वर्णत नियमों को सबसे अधिक प्रमुखता मिली।

·         समानसमान को जन्म देता है  इस नियम के अनुसार मातापिता जिसे होते है उनकी संतान भी वैसी ही होगी यदि माता -पिता बुद्धिमान है तो उनकी संतान भी बुद्धिमान होगी और यदि मातापिता कद में छोटे होगी तो उन की संतान भी छोटे कद के होगे, और रंग में काले आथव सावले तो बच्चे भी वैसे ही होगे। इस नियम को परखने के बाद यह पाता लगा कि इस नियम का सामान्यीकरण (Generalization) नहीं कर सकते, क्योकि कभी कभी यह भी देखा गया है। सुन्दर माता पिता के बच्चे सुन्दर नही होते, तथा कुरूप मातापिता के बच्चे सुन्दर पैदा होते हैै।

·         भिन्नता का नियम (Law of variation ) : इस नियम के अनुसार यह सिद्ध हुआ संतान बिल्कुल मातापिता की हमशक्ल या समान नहीं होते है उनमें भिन्नता होने पर भी वह वंशानुक्रम से प्रभावित माने गये। इस नियम द्वारा यह पाता लगा कि ये दोनो नियम एक दूसरे के  विरोधी है, इस लिये मैडल ने तीसरा नियम बताया।

·         प्रत्यागम का नियम (Law of Regression) : सर्व प्रथम इस सिद्धांत का प्रतिपादन सोरेन्सन ने किया। इस सिद्धांत को फिर मैडल ने अपनाया। सोरेन्सन ने इसको स्पष्ट करते हुए कहा कि तीव्र बुद्धि वाले मातापिता के बच्चे का तीव्र बुद्धि वाली और प्रतिभाशाली मातापिता के बच्चे कम प्रतिभाशाली होने की प्रवृति वही प्रत्यागम कहलती है।

यहाँ तीन नियम शिक्षा मनोविज्ञान की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है इस नियम द्वारा अध्यापक बालक की प्रवृत्ति और उसका स्तर जानने के लिए वंशानुक्रम के यहाँ तीन नियमो की मदद से बालको की प्रवृति को  आसानी से समझ सकते है, जिसके मदद से अध्यापक बालक के प्रवृति को आसानी से समझ सकते हैं। और इस के माध्यम से बालक के व्यक्तित्व को समझ जा सकता है जा सकता है और इसका विश्लेषण करके परिणामों तक पहुंच सकता है ।


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