वंशानुक्रम की प्रक्रिया ( Process of heredity
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इस मैथून क्रिया के दौरान जनन अंगो के मिलने से गर्भाशय (utarus)
के द्वार पर हजारो की संख्या में Sperm या वीर्य पड़े रहते है जो की मातृसूत्र Ovum तक पहुँचने का प्रयास करते है। इस संपूर्ण कार्य में एक ही पितृसूत्र या Sperm Ovum तक पहुँच पाता है। और जो Ovum तक पहुच कर निषेचित (Fertilizer) करता है। जो कि निषेचित रच (Zygot) कहलाता है। इस प्रकार निषेचित होना ही गर्भधारण होना कहलता है। जो कि एक जीवन को जन्म देती है। जो कि चित्र के माध्यम से देखे : एक निषेचित अंड में गुणसूत्रो की 23 जोड़े पाये जाते है जिनमें आधे – पिता के व आधे माता के होते है।
जीवशास्त्रीयो के अनुसारः “ निषिक्त अण्ड में सम्भावित विद्यमान विशिष्ट गुणों का योग ही आनुवंशिकता है।”
वंशानुक्रम के नियम (Laws of Heredity) :
वंशानुक्रम के नियमो को अलग अलग विद्वानो ने भिन भिन प्रकार से बताया है जिन में मैंडल (Mendal) द्वारा वर्णत नियमों को सबसे अधिक प्रमुखता मिली।
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समान – समान को जन्म देता है – इस नियम के अनुसार माता – पिता जिसे होते है उनकी संतान भी वैसी ही होगी यदि माता -पिता बुद्धिमान है तो उनकी संतान भी बुद्धिमान होगी और यदि माता – पिता कद में छोटे होगी तो उन की संतान भी छोटे कद के होगे, और रंग में काले आथव सावले तो बच्चे भी वैसे ही होगे। इस नियम को परखने के बाद यह पाता लगा कि इस नियम का सामान्यीकरण (Generalization) नहीं कर सकते, क्योकि कभी कभी यह भी देखा गया है। सुन्दर माता पिता के बच्चे सुन्दर नही होते, तथा कुरूप माता – पिता के बच्चे सुन्दर पैदा होते हैै।
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भिन्नता का नियम (Law of variation ) : इस नियम के अनुसार यह सिद्ध हुआ संतान बिल्कुल माता – पिता की हमशक्ल या समान नहीं होते है उनमें भिन्नता होने पर भी वह वंशानुक्रम से प्रभावित माने गये। इस नियम द्वारा यह पाता लगा कि ये दोनो नियम एक दूसरे के विरोधी है, इस लिये मैडल ने तीसरा नियम बताया।
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प्रत्यागम का नियम (Law of Regression)
: सर्व प्रथम इस सिद्धांत का प्रतिपादन सोरेन्सन ने किया। इस सिद्धांत को फिर मैडल ने अपनाया। सोरेन्सन ने इसको स्पष्ट करते हुए कहा कि तीव्र बुद्धि वाले माता – पिता के बच्चे का तीव्र बुद्धि वाली और प्रतिभाशाली माता – पिता के बच्चे कम प्रतिभाशाली होने की प्रवृति वही प्रत्यागम कहलती है।
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