बालक के सामाजिक विकास पर वातावरण का प्रभाव –
मनोवैज्ञानिकों द्वारा किये गए अध्ययन के आधार पर यह साबित होता है, कि बालक के व्यक्तित्व पर भौगोलिक, सामाजिक और सांस्कृतिक वातावरण का महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यहाँ वातावरण का व्यक्ति के जीवन में पड़ने वाले प्रमुख प्रभावों को बताया गया है, जो कि निम्नलिखित हैं–
1.
वातावरण का शारीरिक अन्तर पर प्रभाव
2.
वातावरण का मानसिक विकास पर प्रभाव
3.
वातावरण का बुद्धि पर प्रभाव
4.
वातावरण का व्यक्तित्व पर प्रभाव
5.
वातावरण का प्रजाति की श्रेष्ठता पर प्रभाव
6.
वातावरण का अनाथ बच्चों पर प्रभाव
7.
वातावरण का जुड़वाँ बच्चों पर प्रभाव
8.
वातावरण का बालक पर बहुमुखी प्रभाव
1. वातावरण का शारीरिक अन्तर पर प्रभाव :-
वातावरण का शारीरिक अन्तर पर प्रभाव के संबंध में फ्रेन्ज बोन्स का मत है कि–
“विभिन्न प्रजातियों के शारीरिक अन्तर का कारण वंशानुक्रम न होकर वातावरण है ।“
– फ्रेन्ज बोन्स
फ्रेन्ज बोन्स ने अपने वातावरण का शारीरिक अन्तर पर प्रभाव पर दिए गए विचार को साबित करने के लिए अनेक उदाहरण दिए हैं जैसे कि फ्रेन्ज बोन्स ने कहा कि जो जापानी और यहूदी लोग अमेरिका में अनेक पीढ़ियों से निवास कर रहे हैं, उनकी लम्बाई अमेरिका के भौगोलिक वातावरण के कारण बढ़ गयी ।
2. वातावरण का मानसिक विकास पर प्रभाव :-
वातावरण का मानसिक विकास पर पड़ने वाले प्रभाव के लिए गोर्डन का मानना है कि व्यक्ति को अपने चारों ओर उचित सामाजिक और सांस्कृतिक वातावरण न मिलने पर मानसिक उसकी विकास की गति धीमी हो जाती है । गोर्डन ने अपने मत को लेकर नदियों के किनारे रहने वाले बच्चों का उदाहरण दिया और अध्ययन करके सिद्ध किया की इन बच्चों का वातावरण अच्छा न होने के कारण इनके विकास की गति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा था ।
3. वातावरण का बुद्धि पर प्रभाव :-
वातावरण का बुद्धि पर प्रभाव पर केंडोल ने अध्ययन करके बताया कि –
“बुद्धि के विकास पर वातावरण का प्रभाव, बुद्धि के विकास पर पड़ने वाले वंशानुक्रम के प्रभाव की अपेक्षा अधिक होता है |”
– केंडोल
केंडोल ने बुद्धि पर वातावरण के प्रभाव के बारे में जानने के लिए फ्रांस के 552 विद्वानों का अध्ययन करके पता लगाया कि उनमें से अधिकांश धनी वर्ग से सम्बन्धित थे। जिससे उनको शिक्षा ग्रहण करने की उपयुक्त सुविधाएँ उपलब्ध हुईं ।
स्टीफैंस
ने केंडोल का समर्थन किया और कहा की–
“यदि बच्चों को अच्छे वातावरण में पाला जाये, तो उनकी बुद्धि-लब्धि में वृद्धि होती है |”
– स्टीफैंसन
4. वातावरण का व्यक्तित्व पर प्रभाव
वातावरण का व्यक्तित्व पर प्रभाव के सम्बंध में कूले ने 71 साहित्यकारों का अध्ययन करके पता लगाया कि उनमें से दो साहित्यकार निर्धन परिवारों के थे, किन्तु उत्तम वातावरण मिलने के कारण वे दोनों भी महान साहित्यकार बन सके ।
उत्तम वातावरण में पलने पर बच्चों का व्यक्तित्व का विकास बहमुखी होता है। यदि निर्धन माता-पिता के बालक को अच्छे वातावरण में पाला जाये, तो वह भी अच्छे व्यक्तित्व का निर्माण कर सकता है।
5. वातावरण का प्रजाति की श्रेष्ठता पर प्रभाव :-
वातावरण का प्रजाति की श्रेष्ठता पर प्रभाव के संबंध में क्लार्क ने अपना मत देते हुये कहा है कि–
“कुछ प्रजातियों की बौद्धिक श्रेष्ठता का कारण वंशानुक्रम न होकर वातावरण है |”
– क्लार्क
क्लार्क ने वातावरण का प्रजाति की श्रेष्ठता पर प्रभाव में अपने विचार अमरीका के कुछ गोरे और नीग्रो लोगों की बुद्धि परीक्षा लेकर सिद्ध किया क्लार्क का कहना है कि, नीग्रो प्रजाति की बुद्धि का स्तर इसलिए निम्न है, क्योंकि उनको अमेरिका की श्वेत प्रजाति के समान शैक्षिक, सांस्कृतिक और सामाजिक वातावरण उपलब्ध नहीं होता है |
6. वातावरण का अनाथ बच्चों पर प्रभाव :-
समाज कल्याण केन्द्रों में अनाथ और बेसहारा बच्चे आते है। वे साधारणतः निम्न परिवारों से संबंध रखते हैं, लेकिन समाज कल्याण केन्द्रों में उनका अच्छा पालन-पोषण होता है, और उनको एक बेहतर वातावरण भी मिलता है, जिससे उनको अच्छा व्यक्तित्व प्राप्त होता है ।
“इस प्रकार के वातावरण में पाले जाने वाले बच्चे समग्र रूप में अपने माता-पिता से अच्छे ही सिद्ध होते हैं |”
– वुडवर्थ
7. वातावरण का जुड़वाँ बच्चों पर प्रभाव :-
जुड़वाँ बच्चों के शारीरिक लक्षणों, मानसिक शक्तियों, व्यवहार और शैक्षिक योग्यताओं में, अत्यधिक समानता होती है । लेकिन यदि दोनों बच्चों को अलग-अलग वातावरण में रखा जाए तो उनमें पर्याप्त अन्तर होता है । न्यूमैन, फ्रीमैन और होलजिंगर ने 20 जोड़े जुड़वाँ बच्चों में प्रत्येक
जोड़े के एक बच्चे को गाँव के फार्म पर और दूसरे को नगर में रखा । बड़े होने पर दोनों बच्चों में पर्याप्त अन्तर पाया गया ।
“पर्यावरण का बुद्धि पर साधारण और उपलब्धि पर अधिक व विशेष प्रभाव पड़ता है |”
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8. वातावरण का बालक पर बहुमुखी प्रभाव :-
वातावरण, मनुष्य के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, संवेगात्मक सहित सभी गुणों पर गहरा प्रभाव डालता है। इसकी पुष्टि एवेरॉन के जंगली बालक के उदाहरण से की–
एक बच्चे को जन्म के बाद ही भेड़िया उठा ले गया था और उसका पालन-पोषण जंगली पशुओं के बीच में हुआ था। कुछ शिकारियों ने उसे सन 1799 ई. में पकड़ लिया। उस समय उसकी आयु 11 या 12 वर्ष की थी । वह बच्चा पशुओं के समान हाथों-पैरों से चलता था। वह कच्चा मांस खाता था। उसमें मनुष्य के समान बोलने और विचार करने की शक्ति नहीं थी। उसको मनुष्य के समान सभ्य और शिक्षित बनाने के सब प्रयास विफल हुए ।
वातावरण के मानव जीवन में पड़ने वाले प्रभावों के विषय में हुए स्टीफेन्स ने लिखा है–
“बच्चा जितने अधिक समय उत्तम वातावरण में रहता है, उसका व्यक्तित्व उतना ही उत्तम होगा। हालांकि मनुष्य के व्यक्तित्व और वृद्धि में कुछ प्रभाव आनुवंशिकता भी होता है |”
– स्टीफेन्स
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