वाइगोत्सकी का सामाजिक-सांस्कृतिक विकास का सिद्धान्त (Lev Vygotsky’s
Theory)
सिमानोविच वाइगाट्सकी एक रूसी मनोवैज्ञानिक थे, जिन्होंने बच्चों और समाज के बुजुर्ग जानकार सदस्यों के बीच मिल-जुलकर होने वाले संवाद की भूमिका पर बल दिया । उनके अनुसार सभी बौद्धिक क्रियाएं पहले बाहरी दुनिया में घटित होती हैं । बड़ों के साथ बातचीत के इन अवसरों द्वारा बच्चे अपने समुदाय की संस्कृति (सोचने और व्यवहार करने के तरीके) को सीखते हैं।
वाइगाट्सकी
का सामाजिक-सांस्कृतिक दृष्टिकोण संज्ञानात्मक विकास का एक रोचक विश्लेषण करता है । वाइगास्टकी की लोकप्रियता अपने अंतरीकरण के सिद्धांत तथा संभावित विकास क्षेत्र (जोन ऑफ़ प्रॉक्सिमल डेवेलपमेंट) के कारण है।
वाइगोत्सकी के अधिगम सिद्धांत को समझने के लिए प्रमुख बिंदुओं पर विचार किया जाना आवश्यक है। जिन पर वाइगोत्सकी ने प्रमुख रूप से बल दिया है।
1. संज्ञानात्मक विकास में सामाजिक अंतः क्रिया की भूमिका (Role of social interaction in Cognitive
development)
2. ZPD की अवधारणा (Concept of zone of proximal
development)
3. Scaffolding
4. More Knowledgable Other (MKO)
1. संज्ञानात्मक विकास में सामाजिक अंतः क्रिया की भूमिका (Role of social
interaction in Cognitive
development)
वाइगाट्सकी का मानना था कि विकास वातावरण में शुरू होता है, विशेषकर सामाजिक वातावरण में। इसमें इंसान से बाहर होने वाले अवलोकन को अपने भीतर आत्मसात करके सीखता है। उदाहरण के तौर पर छोटे बच्चे कक्षा में अपने शिक्षक की तरह कुर्सी पर बैठकर अन्य बच्चों को चुपचाप बैठकर पढ़ने और आपस में बात न करने के निर्देश देने का अभिनय करते हैं। यानि बच्चे दूसरे लोगों को घर पर, दोस्तों के बीच तथा स्कूल में तरह-तरह के कामों को करता हुआ देखते हैं और उसी तरह व्यवहार करना सीखते हैं।
2. समीपस्थ या सम्भावित विकास का सिद्धान्त (Zone of Proximal Development or ZPD Theory)
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संभावित विकास के क्षेत्र की अवधारणा वाइगाट्सकी के सबसे महत्वपूर्ण योगदान में से एक है। संभावित विकास का क्षेत्र उस अंतर को रेखांकित करता है जो एक सीखने वाला खुद से कर सकता है और दूसरे की मदद से कर सकता है।3. Scaffolding (ढाँचा
निर्माण):
इस प्रक्रिया में अधिक से अधिक सक्षम एवं योग्य निर्देशकों की सहायता ली जा सकती है | यह उपागम संज्ञानात्मक योग्यता विकास की गति में वृद्धि करता है | जैसे- मान लें कि एक बच्चा किसी समस्या का समाधान करना चाहता है, परन्तु कर नही पाता है | यदि उसे अपने माता या पिता से सहायता मिल जाये, तो उसका समाधान कर सकता है | परन्तु, यदि किसी बालक में कौशल अधिक है तो ऐसे सहयोग की आवश्यकता नही पड़ेगी | <k¡pk
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