बालक के सामाजिक विकास पर वंशानुक्रम का प्रभाव –
यहाँ हम
आपको बालक के जीवन में वंशानुक्रम के
प्रभावों में
से कुछ
प्रमुख प्रभावों के बारे में बताएँगे जो कि
निम्नलिखित हैं–
1.
वंशानुक्रम का मूल शक्तियों पर प्रभाव
2.
वंशानुक्रम का शारीरिक लक्षणों पर प्रभाव
3.
वंशानुक्रम का प्रजाति की श्रेष्ठता पर प्रभाव
4.
वंशानुक्रम का व्यावसायिक योग्यता पर प्रभाव
5.
वंशानुक्रम का सामाजिक स्थिति पर प्रभाव
6.
वंशानुक्रम का चरित्र पर प्रभाव
7.
वंशानुक्रम का महानता पर प्रभाव
8.
वंशानुक्रम का वृद्धि पर प्रभाव
1. वंशानुक्रम का मूल शक्तियों पर प्रभाव :-
थॉर्नडाइक ने बालक के जीवन और विकास में बालक की मूल शक्तियों में वंशानुक्रम के प्रभाव को वरीयता दी है । थॉर्नडाइक का मानना है कि बालक की मूल शक्तियों का मुख्य कारण उसका वंशानुक्रम है ।
2. वंशानुक्रम का शारीरिक लक्षणों पर प्रभाव :-
वंशानुक्रम
का प्रभाव मानव के शारिरिक लक्षणों में भी पड़ता है। कार्ल पीयरसन वंशानुक्रम के शारीरिक लक्षणों के प्रभावों के संबंध में अपना मत दिया है कि यदि ” माता-पिता की लम्बाई का असर उनकी संतानों में भी पड़ता है, जो कि एक प्रकार का शारीरिक लक्षण है।
3. वंशानुक्रम का प्रजाति की श्रेष्ठता पर प्रभाव :-
4. वंशानुक्रम का व्यावसायिक योग्यता पर प्रभाव :-
कैटल ने व्यावसायिक योग्यता का मुख्य कारण वंशानुक्रम को ही मानते हैं । कैटल ने व्यावसायिक में वंशानुक्रम का प्रभाव का पता करने के लिए अमेरिका के 885 वैज्ञानिकों के परिवारों का की योग्यता का अध्ययन किया और बताया कि कुल 885 वैज्ञानिक परिवारों में से व्यवसायी वर्ग से संबंध रखने वाले परिवारों की संख्या कुल संख्या का 2/5 थी, इसी प्रकार उत्पादक वर्ग के 1/2 और कृषि वर्ग के केवल 1/4 परिवार थे।
5. वंशानुक्रम का सामाजिक स्थिति पर प्रभाव :-
विनशिप ने वंशानुक्रम का सामाजिक स्थिति पर प्रभाव के संबंध में अपने विचार देते हुए कहा है, कि गुणवान और प्रतिष्ठित माता-पिता की सन्तान भी अपने जीवनकाल में प्रतिष्ठा प्राप्त करती है।
विनशिप ने वंशानुक्रम के सामाजिक स्थिति पर प्रभाव में अपना मत देने से पहले उन्होंने एडवर्ड और उनकी पत्नी एलिजाबेथ के परिवार का अध्ययन किया जो कि (एडवर्ड और एलिजाबेथ) एक प्रतिष्ठित परिवार से संबंध रखते थे। जिनके वंशजों ने प्रतिष्ठित पदों पर कार्य किया और उनके वंशजों में से एक अमेरिका का उपराष्ट्रपति भी बना।
6. वंशानुक्रम का चरित्र पर प्रभाव :-
डगडेल का वंशानुक्रम का चरित्र पर प्रभाव पर मानना है कि चरित्रहीन माता-पिता की सन्तान चरित्रहीन होती है। और इसी प्रकार अच्छे चरित्र वाले माता पिता की संतानें भी अच्छी चरित्र वाली होती हैं।
डगडेल ने वंशानुक्रम का चरित्र पर प्रभाव पर अपना विचार सन 1877 ई. में ज्यूकस के वंशजों का अध्ययन करके दिया था।
7. वंशानुक्रम का महानता पर प्रभाव :-
गाल्टन का वंशानुक्रम का महानता पर प्रभाव के बारे में सीधा मत है, कि व्यक्ति की महानता का कारण उसका वंशानुक्रम है ।
व्यक्ति का कद, वर्ण, स्वास्थ्य, बुद्धि, मानसिक शक्ति आदि उसके वंशानुक्रम पर आधारित होते हैं। वंशानुक्रम का महानता पर प्रभाव में गॉल्टन कहते हैं कि–
“महान न्यायाधीशों, राजनीतिज्ञों, सैनिक पदाधिकारियों, साहित्यकारों, वैज्ञानिकों और खिलाड़ियों के जीवन चरित्रों का अध्ययन करने से ज्ञात होता है, कि इनके परिवारों में इन्हीं क्षेत्रों में महान कार्य करने वाले अन्य व्यक्ति भी हुए हैं ।“
– गाल्टन
(वंशानुक्रम का महानता पर प्रभाव)
8. वंशानुक्रम का वृद्धि पर प्रभाव :-
गोडार्ड ने वंशानुक्रम का वृद्धि पर प्रभाव पर कहा है, कि मन्द बुद्धि माता-पिता की सन्तान मन्द बुद्धि और तेज बुद्धि के माता-पिता की सन्तान तीव्र बुद्धि वाली होती है।
वंशानुक्रम
के वृद्धि पर प्रभाव पर कोलेसनिक ने कहा है कि–
“जिस सीमा तक व्यक्ति की शारीरिक रचना को उसके पित्रैक निश्चित करते हैं, उस सीमा तक उसके मस्तिष्क एवं स्नायु संस्थान की रचना, उसके अन्य लक्षण, उसकी खेल-कूद सम्बन्धी कुशलता और उसकी गणित सम्बन्धी योग्यता ये सभी बातें उसके वंशानुक्रम पर निर्भर होती हैं, पर वे बातें उसके वातावरण पर कहीं अधिक निर्भर होती है |”
– कोलेसनिक
(वंशानुक्रम का वृद्धि पर प्रभाव)
उपरोक्त कथनों से स्पष्ट रूप से पता चलता है कि व्यक्ति के शारीरिक तथा मानसिक विकास पर वंशानुक्रम का प्रभाव पड़ता है।
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